मेरा प्रथम संगीतबद्ध गीत जिसे बहुत लोगो ने सराहा जिसमे उस स्त्री की पीड़ा गायी गई है जिसके हमसफ़र परदेश रह रहे है और वो पुरे परिवार के साथ देश में उसकी राह देखती रहती है I इस गीत को कोर रूड़की में आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मलेन में डॉ. रहत इंदौरी व डॉ. हरि ओम पंवार जैसी हस्तियों के मंच से मैंने ०२ दिसम्बर २०१८ को पढ़ा था I आज आप सभी को समर्पित I डॉ. रविन्द्र कुमार सैनी Mob. 9634845848
अबके बरस बोले है वो आयेंगे बरसात में
अबके बरस बोले है वो आयेंगे बरसात में
देखो कितनी खुश हूँ मै
देखो कितनी खुश हूँ मै झुला झूलेंगे साथ में
सारा जग सोया है
सारा जग सोया है और मै जागूं आधी रात में
चिठिया खोलु एक एक कर मै
चिठिया खोलु एक एक कर मै डूबूं हर मुलाकात में
तेरे दिल के टूकड़े पूछे
तेरे दिल के टूकड़े पूछे क्या लायेंगे पापा साथ में
अम्मा बाबू जी भी पूछे
अम्मा बाबू जी भी पूछे कैसा है वो विल्यात में
अबके बरस बोले है वो आयेंगे बरसात में
आयेंगे बरसात में
आयेंगे बरसात में ......
@डॉ. रविन्द्र कुमार सैनी
रूड़की
mob. 9634845848

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